कहा गया था हमारे देश का कानून
जब हैवान अपनी हैवानियत दिखा रहे थे
अँधेरी कोटी मे मुझेे बंद कर अत्याचार कर रहे थे
कुत्तों की तरह मुझे नोंंच कर खा रहे थे
कहा गया था हमारे देश का कानून
जब मेरे अल्फाज भी लड़खड़ा रहे थे
ऑंखे बड़ी - बड़ी कर मुझे डरा रहे थे
मेरे अपने ही मुझे शिकार बना रहे थे
कहा गया था हमारे देश का कानून
जब मेरे शरीर पर गहरे घाव बना रहे थे
बेहरहमी से मुझे कुचल कर मार रहे थे
बेदर्दी से मेरी मौत बुला रहे थे
कहा गया था हमारे देश का कानून
जब ''बेटी बचाओं'' के नारे लगा रहे थे
रेप से पीडि़त बेटी के इन्साफ मे मोमबत्तियॉं जला रहे थे
हैवान फिर भी खुले आम दहशत फैला रहे थे
साक्षी जैन
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